हल्की गतिविधि और कम बैठे रहना

शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का मतलब हमेशा जिम जाना या भारी कसरत करना नहीं होता। रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कदम भी बड़ा बदलाव लाते हैं।

काम के बीच विराम

यदि आप वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) कर रहे हैं या ऑफिस में हैं, तो लगातार कंप्यूटर स्क्रीन घूरने से बचें। हर एक घंटे में 5 मिनट के लिए उठें और कमरे में ही थोड़ा टहल लें।

सीढ़ियों का उपयोग

लिफ्ट की आदत छोड़ना मुश्किल है, लेकिन यदि आप सहज महसूस करते हैं, तो एक या दो मंज़िल तक जाने के लिए सीढ़ियों (stairs) का चुनाव करें। यह पैरों और शरीर के लिए बहुत अच्छा है।

शाम की सैर

रात के खाने के बाद तुरंत लेटने के बजाय परिवार के सदस्यों के साथ 15-20 मिनट बाहर टहलें। इससे दिनभर का तनाव भी कम होता है।

A person taking a short walk break from office work

लंबा सफर और हमारी थकान

भारत के बड़े शहरों (जैसे दिल्ली, बेंगलुरु) में लोगों का औसतन 2 से 3 घंटे केवल ट्रैफिक या सफर में निकल जाता है। ऑटो, कैब या बस में बैठे-बैठे शरीर जकड़ जाता है।

यही कारण है कि 'कम चलना' एक बड़ी समस्या बन गया है। जब आप मेट्रो से उतरते हैं, तो कोशिश करें कि एस्केलेटर की जगह सीढ़ियों से चलें। यदि आप कार से ऑफिस जाते हैं, तो अपनी गाड़ी पार्किंग में थोड़ी दूर खड़ी करें ताकि आपको थोड़ा पैदल चलने का मौका मिले। ये छोटी आदतें समय के साथ शरीर को हल्का रखती हैं।

पारदर्शिता सूचना: यह साइट केवल सामान्य ज्ञान साझा करती है। हम यह दावा नहीं करते कि ये आदतें किसी चिकित्सा स्थिति (जैसे ब्लड शुगर असंतुलन) का उपचार करती हैं। किसी भी भारी शारीरिक गतिविधि से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।